पोटेशियम क्लोराइड मिथुन राशि के

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Description

पोटेशियम फॉस्फेट, 100ग्राम पैकेट – मेष राशि के लिए

100% पेड़ों के अर्क से बना|

आपके 3 मिनरल जो राशि के जातक के लिए आवश्यक हैं वर्ष के उन बचे हुए महीनों को दिखाते हैं जब माँ गर्भवती नहीं थी|

 

सम्पूरक आहार

तैयारी और सप्लीमेंट का सेवन

1 चम्मच (5ग्राम) पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में घोलें| रोज एक बार, खाने के बाद सेवन करें| सप्लीमेंट के सेवन के दौरान, प्रतिदिन कम से कम 1 लीटर पानी पिएँ|

इससे पहले उपयोग कर लें:

उत्पादन तिथि से 24 माह तक (तारीख और बैच नंबर पैकेट पर छपे हैं)|
कमरे के सामान्य तापमान (15-25°C) में, सूखे और अँधेरे स्थान पर, बच्चों की पहुँच से दूर रखें|

चेतावनी:

सम्पूरक आहार या डाइटरी सप्लीमेंट मुख्य आहार और स्वस्थ जीवनशैली की जगह नहीं ले सकते हैं| दैनिक अनुशंसित खुराक से ज्यादा का सेवन न करें| यदि आपको उत्पाद में मौजूद किसी तत्व से एलर्जी है तो इसका सेवन न करें| गर्भावस्था और दूध पिलाने के दौरान इन दवाओं का प्रयोग न करें| इस उत्पाद में खनिज लवण हैं जो शारीरिक क्रियाओं में सहायता देते हैं| वे कोशिकीय स्तर पर काम करते हैं और कोशिकाओं को क्रियाशील रखते हैं। ये लवण चयापचय प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं और दैनिक आहार में निहित पोषक तत्वों के अवशोषण में सहयोग देते हैं।

पोटेशियम क्लोराइड की कमी से होने वाली बीमारियों प्रभावित होने वाले शरीर के महत्वपूर्ण अंग: बाँह, हाथ, फेफड़े, परिफुफ्फुस या प्लुरा, लसिका पर्व या लिम्फ नोड, सभी तंतु और ऊतक, श्वसनी या ब्रांकाई|

श्वासनली या ट्रेकिआ, ग्रासनली, दाहिना, ऊपरी खंड (लोब), दाहिना, निचला फेफड़ा, बायाँ, ऊपरी फेफड़ा, बायाँ, निचला फेफड़ा, फेफड़े का एपेक्स, ब्रोन्कस, फुफ्फुस धमनी (पल्मोनरी आर्टरी), फुफ्फुसीय गुहा (पल्मोनरी कैविटी), थाइमस ग्रंथि, साँस की नली में म्यूकस, फुफ्फुस शिराएँ या वेन्स, हंसली या कॉलरबोन, कंधे की हड्डी, परिफुफ्फुस, पहली पसली, दूसरी पसली, स्वरयंत्र की मांसपेशियां, तीसरी पसली, हाथ की मांसपेशियां, ऊपरी हाथ / कंधे, प्रगंडिका या ह्यूमरस, कूर्पर या ओलेक्रॉनन प्रक्रिया (पश्च), त्रिज्या, कलाई की हड्डियां, उंगलियां, कर्भिका या मेटाकार्पल हड्डियां, चौथी पसली, पांचवीं पसली।

मिथुन राशि में जन्मे लोगों की मुख्य विशेषता है अभिव्यक्ति| पोटेशियम क्लोराइड नमक कोशिका लवण एक रक्त खनिज लवण है जो फाइब्रिन बनाता है और इसे ऊतकों में बाँटता है| यह हर कोशिका में पाया जाता है, खासतौर से लाल रक्त कोशिकाओं में|

श्लेष्मा झिल्ली (श्लेष्मा झिल्ली में शोथ या इन्फ्लेमेशन) में नजला होने की स्थिति और मोटापे में यह लवण रोग पर प्रहार करता है| लेकिन इसमें और पोटेशियम क्लोरट में भ्रमित न हों, पोटेशियम क्लोरट एक जहर है(रसायनिक सूत्र KClO3)|

मानव शरीर में फाइब्रिन का वितरण करने में पोटेशियम क्लोराइड की अहम् भूमिका है| जब पोटेशियम क्लोराइड के अणु आवश्यक स्तर से नीचे गिर जाते हैं तो, फाइब्रिन गाढ़ा हो जाता है, और प्लुरिसी, निमोनिया, नजला, डिप्थीरिया, आदि का कारण बनता है|

यदि परिसंचरण प्रणाली ग्रंथियों या म्यूकोसा के माध्यम से गाढ़े फाइब्रिन को हटाने में असफल होती है तो हृदयाघात या लैटिन भाषा में एम्बोलुस का खतरा हो सकता है|

इसलिए एम्बोलुस या “हार्ट फेल” से मृत्यु होने का मतलब है एट्रिया(परिकोष्ठ) और निलय में फाइब्रिन का थक्का जम जाने से हृदय की धड़कन रुक गयी थी|

जैव रसायन के अनुसार पोटेशियम क्लोराइड नामक अकार्बनिक लवण के बिना फाइब्रिन नहीं बनाया जा सकता है, और इस कोशिका लवण या सेल सॉल्ट के उचित स्तर के बिना रक्त में फाइब्रिन की वांछित मात्रा प्राप्त नहीं की जा सकती है| फाइब्रिन विशिष्ट रेशेदार-प्लास्टिक पदार्थों (एल्बिनोइड्स) के संयोजन से बनता है, लेकिन यह संयोजन पोटेशियम क्लोराइड अणुओं के बिना असंभव है।

शिराओं के रक्त में यह कम होता है और लसिका या लिम्फ में तो और भी कम होता है| शोथ के कारण होने वाले स्राव में फाइब्रिन होता है, उदाहरण के लिए प्लुरा या पेरिटोनियम और म्यूकस में, साथ ही नजला, डिप्थीरिया, ट्रेकाइटिस, ब्रोंकाइटिस और लैरींगाइटिस इत्यादि में| शोथ या इन्फ्लेमेशन में पोटेशियम क्लोराइड के साथ आयरन फॉस्फेट बदल-बदल कर देना चाहिए, क्योंकि फाइब्रिन के बहने से संतुलन बिगड़ता है और लोहे के कणों में ऑक्सीजन होती है|

एल्बिनोइड्स पर असर डालकर और ऑक्सीजन की सहयोग से, पोटेशियम क्लोराइड फाइब्रिन के बनने में महत्वपूर्ण कारक बन जाता है| जीभ या टॉन्सिल पर सफ़ेद या सलेटी परत, पोटेशियम क्लोराइड और ऑक्सीजन की कमी से अक्रियाशील हुए फाइब्रिन के कारण हो सकती है|

मोटी सफ़ेद श्लेष्म और किसी श्लेष्मा के कफ स्राव में फाइब्रिन होता है, और त्वचा के छीलने के दौरान, आटे जैसा दिखता है। यही कारक नरम सूजन को बढ़ाता है।

दूसरी ओर, कैल्शियम लवण और शुद्ध प्रोटीन या सिलिका के कारण कठोर सूजन हो सकती है।

पोटेशियम क्लोराइड मिथुन राशि का कोशिका लवण है| मिथुन राशि फेफड़े, श्वसनी, कंधे, बांह और हाथ, और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की स्वामी है| कैलियम म्यूरिएटिकम एक कोशकीय लवण है, जो हड्डियों की कोशिकाओं को छोड़कर, शरीर की सभी कोशिकाओं की रचना के लिए आवश्यक है और उनके आकार को बनाए रखने में मदद करता है|

पोटेशियम क्लोराइड की कमी के लक्षणों में श्वांसनली में अवरोध, नाक और साइनस का बहना, सूजे हुए लिम्फ नोड आदि शामिल हैं; इसके कारण गलसुआ(मम्प्स) और गंडमाला (एनजाइना) होने का खतरा भी होता है| जब शरीर पोषक तत्वों को तोड़ने में असफल होता है तो उन्हें म्यूकस या बलगम के रूप में निकालता है जिससे श्लेष्मा झिल्ली में इन्फ्लेमेंशन हो जाता है|

पोटेशियम क्लोराइड मांसपेशी, तंत्रिका कोशिका, रक्त, श्लेष्मा झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) और मष्तिष्क कोशिकाओं का मुख्य तत्व होता है| रक्त में, यह फाइबर बनाने में मदद करता है| 

रक्त में फाइब्रिन की कमी को सघन सफ़ेद स्राव से जोड़कर कर देखा जाता है|

फिर से स्वस्थ होने के लिए कैल्शियम फॉस्फेट के साथ, इस लवण के सेवन की सलाह दी जाती है| कान और गले के रोगों में भी इसकी सलाह दी जाती है; गंडमाला या एनजाइना में यह बहुत प्रभावी होता है|

सिरदर्द, बुखार, अल्सर, हेमोरेज या रक्त बहने, खाँसी और विलनी या स्टाई में अक्सर पोटेशियम फॉस्फेट को आयरन फॉस्फेट के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है|

 

Additional information

Weight 0.1 kg